First Audit Field report out; No connections given by UP power Discom in 20 out of 25 electrified villages in Hathras district

First Audit Field report out; No connections given by UP power Discom in 20 out of 25 electrified villages in Hathras district

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 25 विद्युतीकृत गांवों में से 20 गांव अभी भी बिजली से वंचित हैं। केन्द्र सरकार द्वारा क्षेत्र सर्वेक्षण से यह पता चला है कि उत्तर प्रदेश बिजली विभाग ने इन गांवों में परिवारों को अभी भी कनेक्शन जारी नही किये हैं।

बिजली के बुनियादी ढांचा बनने, सफल रूप से परीक्षण होने व सक्रिय होने के बावजूद भी कनेक्शन जारी नहीं किये गए। समाजवादी पार्टी शासित उत्तर प्रदेश सरकार को बुनियादी सुविधाओं के होने पर भी अपने लोगो को जानबूझकर अंधेरे में रखने के लिए कुछ कठिन जवाब तलाशने होंगे।

कई गांवों में बिजली के लिए बनाई गयी बुनियादी सुविधाओं का उपयोग नहीं किया गया व राज्य बिजली विभाग द्वारा कभी भी बिजली सप्लाई नहीं की गयी। जिससे कि न केवल बुनियादी ढांचा बर्बाद हो रहा है बल्कि यह अपने लोगों को अवैध साधनों के माध्यम (या कटिया कनेक्शन के माध्यम से एक फ्लैट दर का भुगतान करके) से बिना मीटर कनेक्शन के लिए बिजली उपयोग करने के लिए मजबूर कर रहे है।

एक क्षेत्र ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार एक आश्चर्यजनक तथ्य सामने आया है कि उत्तर प्रदेश राज्य बिजली विभाग, डी.वी.वी.एन.एल. द्वारा हाथरस जिले में 25 विद्युतीकृत गांवों में से 20 गांवों में अभी भी विद्युत आपूर्ति नहीं कराई गयी है।

उत्तर प्रदेश के नगला फतेला गांव के विद्युतीकरण की हाल ही की घटना के बाद केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने भारत भर में उन सभी गांवो का गहराई से ऑडिट करने का आदेश दिया था जो गांव विद्युतीकृत सूची में शामिल किये गए थें।

इन क्षेत्र ऑडिट सर्वेक्षण की प्रथम रिपोर्ट के अनुसार हाथरस जिले के 25 विद्युतीकृत गांवों में बिजली के लिए नयी बुनियादी सुविधाएं बन गयी है, सफल परीक्षण भी कर लिया गया है, किन्तु फिर भी इनमे से लगभग 20 गांवों में प्रारंभिक एनर्जाइजेशन (जिसका अर्थ है कि गांव को विद्युतीकृत घोषित करने से पहले खंभे और तारों के माध्यम से बिजली प्रवाहित कराई गई) के बाद भी में कोई कनेक्शन जारी नहीं किया गया व बिजली की सतत आपूर्ति भी उपलब्ध नहीं कराई गयी।

कनेक्शन जारी करने व निरंतर एनर्जाइजेशन (खंभे और तारों के माध्यम से बिजली के निरंतर प्रवाह ) की जिम्मेदारी राज्य बिजली विभाग की है। केंद्र सरकार की डी.डी.यू.जी.जे.वाई. योजना के तहत इन सभी 20 गांवों में बिजली के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के बावजूद भी लोगों को बिजली कनेक्शन जारी नहीं करके इन लोगो को इस योजना से लाभान्वित क्यों नहीं होने दिया गया।

रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कारपोरेशन द्वारा नियुक्त ग्राम विद्युत अभियंता (इंजीनियरस जो कि क्षेत्र में कार्य करते है) के क्षेत्र सर्वेक्षण से यह पता चला है कि अधिकांश घरों में बिना मीटर का कनेक्शन हैं (कटिया के माध्यम से ट्रांसफार्मर या अन्य प्रयोजनों के लिए बनायी गयी बुनियादी सुविधाओं से) व लोग इस तरह के अवैध कनेक्शन के माध्यम से बिजली उपयोग करने के लिए भुगतान भी कर रहे हैं।

डी.डी.यू.जी.जे.वाई. के तहत हाथरस जिले में 25 गांवों (जो विद्युतीकरण के लिए प्रस्तावित किये गये थे ) में से केवल 5 गांवों में नव-निर्मित बुनियादी ढांचे के माध्यम से बिजली उपलब्ध करायी जा रही है।

क्षेत्र के ऑडिट में कुछ मुख्य चीज़े सामने आयी है जैसे कि अधिकांश गांवो में नए बुनियादी ढांचे की चार्जिंग (लाइनों  में विद्युत का प्रवाह ) को विद्युत निरीक्षणालय की मंजूरी न मिलने के अभाव मे रोक लिया गया है (कई जगहों पर छह महीने से भी ज्यादा देरी के मामले सामने आये है )। विद्युत निरीक्षणालय की फीस का भुगतान सीधे डिस्कॉम द्वारा किया जाता है। यह भी पता चला है कि ठेकेदारों को यह शुल्क भुगतान करने के लिए कहा गया जो कि चार्जिंग कार्यो में अनावश्यक देरी का मुख्य कारण है।

जब रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कारपोरेशन के अधिकारियों से इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना है कि एक पत्र के माध्यम से (पत्र 28 अगस्त, 2014) सभी राज्यों को लगभग दो साल पहले ही इन मामलों में देरी से मंजूरी मिलने से बचने के लिए यह सलाह दी गयी थी कि बिजली के निरीक्षणालय की जिम्मेदारी डिस्कॉम के अधिकारियों को प्रत्यायोजित की जा सकती है। मध्य प्रदेश जैसे राज्य पहले से ही एक राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से इसे प्रत्यायोजित कर चुके है। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कोई भी कदम नही उठाया है।

केंद्र सरकार ने रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कारपोरेशन(आरईसी) के केंद्र और प्रबंध निदेशक के माध्यम से डी.वी.वी.एन.एल. (उत्तर प्रदेश राज्य डिस्कॉम) व अन्य अधिकारियों को इन विसंगतियों के बारे में अवगत कराया है व अधिकारियों को नव निर्मित बुनियादी ढांचे के निरंतर एनर्जाइजेशन के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए कहा गया है।